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वाजसनेयी धारण यज्ञोपवीत मन्त्र

ॐ यज्ञोपवीतम् परमं पवित्रं प्रजापतेर्यत्सहजं पुरस्तात् ।
आयुष्यमग्र्यं प्रतिमुञ्च शुभ्रं यज्ञोपवीतं बलमस्तु तेजः ।
ॐ यज्ञोपवीतमसि यज्ञस्य त्वोपवीतेनोपनह्यामि ॥

अर्थ

ई यज्ञोपवीत परम पवित्र अछि; ई प्रजापतिक सहज उत्पत्ति अछि। ई उत्तम आयु प्रदान करऽवाला, उज्ज्वल आ पवित्र अछि। हम ई यज्ञोपवीत धारण करैत छी; ई हमरा लेल बल आ तेजक कारण बनय। हे यज्ञोपवीत! अहाँ यज्ञक प्रतीक छी; यज्ञक लेल हम अहाँकेँ धारण करैत छी।

कहिया पढ़ी

उपनयन आ यज्ञोपवीत धारणक समय।

विधि

शुद्ध आसन पर बैसि, पूर्व वा उत्तर दिशा दिस मुँह क' क' शान्त मन सँ पाठ करू। उच्चारण स्पष्ट राखू।