अर्थ
जाहि रक्षा-सूत्र सँ महाबली दानवराज बलि बान्हल गेल छल, ओहि रक्षा-सूत्र सँ हम अहाँकेँ बान्हैत छी। हे रक्षासूत्र! अहाँ अडिग रहू, कखनो विचलित नहि होऊ।
अपन मिथिला अपन एप्प · पण्डौल, मधुबनी, बिहार
येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः ।
तेन त्वाम् प्रतिबध्नामि रक्षे मा चल मा चल ॥