अर्थ
जे प्राणी शस्त्र-अस्त्र सँ मारल गेल छथि आ जे युद्धादि कारण सँ मृत्यु प्राप्त कयलनि, हुनकर शरीरकेँ आकाशीय अग्निरूप उज्ज्वल ज्योति सँ दग्ध हो। हमर कुलमे जे प्राणी अग्नि सँ दग्ध भेल छथि अथवा नहि दग्ध भेल छथि, सभ उज्ज्वल ज्योतिक प्रभाव सँ शुद्ध भऽ परम गति प्राप्त करथि। जे प्राणी यमलोक छोड़ि महालयमे आबि गेल छथि, से सभ उज्ज्वल ज्योतिक मार्ग देखैत आगाँ बढ़थि।