मुख्य सामग्री पर जाउ
+९१ ७०११९ ५६२८६
Hello Mithila

उल्का भ्रमण

शस्त्राशस्त्रहतानां च भूतानां भूतदर्शयोः ।
उज्ज्वल ज्योतिषा देहं निदहे व्योमवह्निना ।
अग्निदग्धाश्च ये जीवा येऽप्यदग्धाः कुले मम ।
उज्ज्वलज्योतिषा दग्धास्ते यान्तु परमां गतिम् ॥
यमलोकं परित्यज्य आगता महालये ।
उज्ज्वलज्योतिषा वर्त्म पश्यन्तो व्रजन्तु ते ॥

अर्थ

जे प्राणी शस्त्र-अस्त्र सँ मारल गेल छथि आ जे युद्धादि कारण सँ मृत्यु प्राप्त कयलनि, हुनकर शरीरकेँ आकाशीय अग्निरूप उज्ज्वल ज्योति सँ दग्ध हो। हमर कुलमे जे प्राणी अग्नि सँ दग्ध भेल छथि अथवा नहि दग्ध भेल छथि, सभ उज्ज्वल ज्योतिक प्रभाव सँ शुद्ध भऽ परम गति प्राप्त करथि। जे प्राणी यमलोक छोड़ि महालयमे आबि गेल छथि, से सभ उज्ज्वल ज्योतिक मार्ग देखैत आगाँ बढ़थि।

कहिया पढ़ी

पितृपक्ष में उल्का भ्रमणक समय।

विधि

शुद्ध आसन पर बैसि, पूर्व वा उत्तर दिशा दिस मुँह क' क' शान्त मन सँ पाठ करू। उच्चारण स्पष्ट राखू।