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Hello Mithila

अनन्त

ॐ अनन्त संसार महासमुद्रे मग्नानाम् अभ्युद्धर वासुदेव ।
अनन्तरूपे विनियोजयस्व अनन्तरूपाय नमो नमस्ते ॥

अर्थ

हे वासुदेव! संसाररूपी अनन्त महासागरमे डूबल हमरा सभकेँ उद्धार करू। हे अनन्तरूप प्रभु! हमरा सभकेँ अपन अनन्त स्वरूपमे लगाउ। अनन्त स्वरूप भगवान्! अहाँकेँ बारम्बार प्रणाम अछि।

कहिया पढ़ी

भादो शुक्ल चतुर्दशी, अनन्त सूत्र धारणक समय।

विधि

शुद्ध आसन पर बैसि, पूर्व वा उत्तर दिशा दिस मुँह क' क' शान्त मन सँ पाठ करू। उच्चारण स्पष्ट राखू।