अर्थ
हे वासुदेव! संसाररूपी अनन्त महासागरमे डूबल हमरा सभकेँ उद्धार करू। हे अनन्तरूप प्रभु! हमरा सभकेँ अपन अनन्त स्वरूपमे लगाउ। अनन्त स्वरूप भगवान्! अहाँकेँ बारम्बार प्रणाम अछि।
अपन मिथिला अपन एप्प · पण्डौल, मधुबनी, बिहार
ॐ अनन्त संसार महासमुद्रे मग्नानाम् अभ्युद्धर वासुदेव ।
अनन्तरूपे विनियोजयस्व अनन्तरूपाय नमो नमस्ते ॥