परम्परा
मिथिलाक विवाह अपन विशिष्ट विधि आ लोकाचार लेल जानल जाइत अछि। सौराठ सभा सँ ल' क' कोहबर धरि — हर चरणक अपन अर्थ अछि।
प्रमुख विधि
- मड़वा — विवाह मण्डपक स्थापना आ पूजन।
- मटकोर — माटि आनि क' कयल जाय बला विधि।
- सिन्दूरदान — विवाहक केन्द्रीय विधि।
- सप्तपदी — सात पग, सात वचन।
- कोहबर — वर-वधूक कक्ष आ ओकर चित्र।
- द्विरागमन — विवाहक बाद वधूक पुनरागमन।
मुहूर्त
विवाहक तिथि गुरु आ शुक्रक उदय, खरमास, होलाष्टक आ अधिक मास केँ देखि क' निर्धारित होइत अछि। कुण्डली मिलानक बाद पंडित जी अन्तिम तिथि बतबैत छथि।